धर्म-संसार

शैलपुत्री माता का परिचय

शैलपुत्री माता का परिचय शैलपुत्री माता देवी दुर्गा के पहले रूपों में से एक मानी जाती हैं। उनका नाम ‘शैलपुत्री’ संस्कृत के ‘शैल’ (पहाड़) और ‘पुत्री’ (बेटी) से मिला है, जिसका अर्थ है ‘पहाड़ की बेटी’। इस नाम से यह स्पष्ट होता है कि माता शैलपुत्री का संबंध पर्वतों से है, जो उनकी शक्ति और

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दशा माता की पौराणिक कथा

दशा माता का महत्व दशा माता की पूजा भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व न केवल भक्तों के जीवन में अद्वितीय लक्षण प्रस्तुत करता है, बल्कि यह उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। मान्यता है कि दशा माता का पूजन करने से व्यक्ति को

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श्रीकृष्ण ने गेंद क्यों यमुना में फेंकी

दुष्ट को कभी छोड़ो मत, चाहे अपनी गेंद फेंक कर ही विवाद मोल क्यों न लेना पड़े। क्या गेंद यूँ ही यमुना में चली गयी थी या फिर श्रीकृष्ण ने जानबूझकर गेंद यमुना में फेंकी थी..? श्रीकृष्ण ने गेंद जानबूझ कर यमुना में फेंकी थी। यमुना तो अपने तट पर बसे लोगों को अपना जल

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होलिका क्यों जलाई जाती हैं

होलिका का महत्व होलिका का पर्व भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है और इसे भव्यता के साथ मनाया जाता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप, विशेषकर हिंदू धर्म में व्यापक रूप से प्रचलित है। होलिका का महत्व बहुआयामी है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई

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नवदुर्गा का मतलब

नवदुर्गा का परिचय नवदुर्गा, हिंदू धर्म की एक महत्वपूर्ण प्रतीक शक्ति का अवतार है, जिसे माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों के रूप में पूजा जाता है। इन्हें दुर्गा पूजा के दौरान विशेष रूप से श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्मानित किया जाता है। नवदुर्गा का मतलब ‘नौ दुर्गा’ होता है, जिसमें प्रत्येक दुर्गा का एक

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मां जमवाय माता जी

आधिकारिक परिचय मां जमवाय माता जी का ऐतिहासिक संदर्भ भारतीय संस्कृति में उनकी महानता को दर्शाता है। मां जमवाय माता जी को विशेष रूप से देवी दुर्गा के आठ दिव्य रुपों में से एक माना जाता है, जो शक्ति, साहस और विनम्रता का प्रतीक हैं। इन्हें आमतौर पर समर्पण, भक्ति और साधना में शामिल भक्तों

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मुझे “साधु-संत” बनने के लिए क्या करना चाहिए?

साधु-संत क्या होते हैं? साधु-संत भारतीय संस्कृति में गहन महत्व रखते हैं। साधु एक ऐसा व्यक्ति होता है जो सांसारिक जीवन से हटकर, साधना और ध्यान में लीन रहता है, जबकि संत वह होता है जो अपने अनुभवों और ज्ञान के माध्यम से दूसरों को मार्गदर्शन देता है। साधु-संतों की विशेषता उनके उच्च नैतिक मूल्यों,

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भूखी माता

भूखी माता का परिचय भूखी माता, जिन्हें भूख की माता के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय लोक संस्कृति में एक प्रमुख देवी मानी जाती हैं। उन्हें समर्पित पूजा विधियों और कथाओं के माध्यम से श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में भूखी माता की पूजा की जाती

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स्वामी समर्थ

स्वामी समर्थ का जीवन परिचय स्वामी समर्थ, जिनका वास्तविक नाम “स्वामी समर्थ रामकृष्ण” था, का जन्म 19वीं सदी के अंत में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनका जन्म स्थान को लेकर विभिन्न मत हैं, लेकिन मुख्यतः उन्हें महाराष्ट्र के नासिक जिले में जन्मा उपासना बनाया गया है। स्वामी समर्थ का परिवार धार्मिक था, जिसने

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