vikas sahu

माता पार्वती जी की आरती

माता पार्वती जी की आरती जय पार्वती माता, जय पार्वती माता । ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता ॥ अरिकुल पद्म बिनासनी, निज सेवक त्राता । जग जीवन जगदम्बा माँ हरिहर गुण गाता ॥ सिंह को वाहन साजे, कुण्डल है साथा । देववधू जहँ गावत, नृत्य करत ता था ।। सतयुग रूपशील अति सुन्दर,

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गायत्री माता की आरती

गायत्री माता की आरती ज्ञान को दीप और श्रद्धा की बाती । सो भक्ति ही पूर्ति करै जहँ घी की ॥ मानस की शुचि थाल के ऊपर । देवी की ज्योति जगै जहँ नीकी ॥ शुद्ध मनोरथ के जहाँ घण्टा । बाजैं करै पूरी आसहु ही की ॥ जाके समक्ष हमें तिहुँ लोक कै ।

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मां नर्मदा जी की आरती

मां नर्मदा जी की आरती : Maa Namada jee kee Aaratee जय जगदम्बा जय नर्मदा भवानी, निकली जलधार जोर पर्वत पताल फोर । छटा छवि आनन्द वरन कवि सुर फनिन्द, काटत जग द्वन्द्व फन्द देत रजधानी । भूषणवस्त्र शुभ विशाल चन्दन की खोर, भाल मनो राव पर्वकाल तेज ओ बखानी । देत मुक्ति परमधाम गावत

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श्री गंगा जी की आरती

श्री गंगा जी की आरती ओ३म् जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता । जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता | ओ३म् जय.. चन्द्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता । शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता ।। ओ३म् जय… पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता । कृपा दृष्टि हो

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संतोषी मा की आरती

संतोषी मा की आरती मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की जय जय संतोषी माता जय जय माँ बड़ी ममता है बड़ा प्यार माँ की आँखों में बड़ी करुणा माया दुलार माँ की आँखों में क्यूँ न देखूँ मैं बारम्बार माँ की आँखों में दिखे हर पल नया चमत्कार माँ की आँखों में नृत्य

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अम्बे तू है जगदम्बे काली /आरती श्री काली जी की

अम्बे तू है जगदम्बे काली: आरती श्री काली जी की अम्बे, तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली । तेरे ही गुन गायें भारती, ओ मैयाहम सब उतारेंतेरी आरती ॥ तेरे भक्तजनों पर माता, भीड़ पड़ी है भारी । दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी ॥ सौ-सौ सिंहों से बलशाली, है

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काली जी की आरती

काली जी की आरती मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े । पान-सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे । सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, सन्तन के भण्डार भरे । संतन-प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे। बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्ध करे। चरण-कमल का लिया आसरा,

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जगदम्बा जी की आरती

जगदम्बा जी की आरती आरती कीजै शैल-सुता की। आरती० । जगदम्बा की आरती कीजै । स्नेह-सुधा, सुख सुन्दर लीजै । जिनके नाम लेत दृग भीजै । ऐसी वह माता वसुधा की । आरती० । पाप विनाशिनि, कलि-मल-हारिणि । दयामयी, भवसागर तारिणि । शस्त्र-धारिणी शैल-विहारिणि । बुद्धिराशि गणपति माता की । आरती० । सिंहवाहिनी मातु भवानी

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मां दुर्गा जी की आरती

मां दुर्गा जी की आरती जय अम्बे गौरी मैया, जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी । माँग सिन्दूर विराजत टीको मृगमद को ।टेक उज्ज्वल से दोऊ नैना, चन्द्रवदन नीको । कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै । रक्तपुष्प गलमाला, कण्ठन पर साजै । केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी । सुर नर मुनि

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श्री राम स्तोत्र/Shree Ram Stotr

श्री राम स्तोत्र : shree raam stotr श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् । नव कंज लोचन कंच मुख कर कंज पद कंजारुणम् । कंन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरम् । पटपीत मानहुँ तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम् । भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनम् । रघुनन्द आनन्द कन्द

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